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作者:扁杜马
来源:余罪
发布时间:2026-08-26

东京爱情故事

视觉中国:持股5%以上股东梁军拟减持不超3%股份_我的网站

古剑奇谭

一 |     视觉中国8月25日公告,公司持股5%以上股东梁军计划在2026年9月17日至12月16日期间,以集中竞价方式减持不超过699.58万股(占总股本1%),以大宗交易方式减持不超过1399.16万股(占总股本2%),合计减持不超过2098.74万股(占总股本3%)。     स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में आज राष्‍ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। अलग-अलग आयोजन हो रहे हैं। क्‍या आप जानते हैं कि राष्‍ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्‍त को ही क्‍यों मनाया जाता है? दरअसल इसी दिन हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्‍यानचंद का जन्‍म हुआ था। ध्यान सिंह का जन्म 29 अगस्‍त 1905 को इलाहाबाद में हुआ था।,उनके दोस्त उन्‍हें चंद कहकर बुला‍ते थे। इसका कारण था कि वह ड्यूटी के बाद घंटों चांदनी रात में प्रैक्टिस करते थे। उन्हें हॉकी का जादूगर ही कहा जाता है। उन्होंने अपने करियर में 1000 से अधिक गोल दागे। उन्‍होंने 1928 एम्सटर्डम, 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन में भारत को ओलंपिक खेलों में लगातार तीन गोल्‍ड मेडल जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।,ध्यानचंद ने 16 साल में ब्रिटिश भारतीय सेना ज्‍वॉइन की थी। उनके पिता समेश्वर सिंह ब्रिटिश आर्मी में थे। इस दौरान ध्यानचंद ने हॉकी खेलना शुरू किया। 1922 और 1926 के बीच उन्होंने कई सेना हॉकी टूर्नामेंट और रेजिमेंटल खेलों में हिस्‍सा लिया था। 1928 में हॉकी को पहली बार ओलंपिक में शामिल किया गया।,1928 में हुए ओलंपिक में ध्यान चंद ने डेब्यू किया। ध्यानचंद ने 14 गोल कर भारत को गोल्‍ड मेडल जिताने में अहम भूमिका निभाई। ध्यानचंद ने 1956 में संन्‍यास का एलान किया था। उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। आइए ध्यानचंद से जुड़ी कुछ रोचक बातें जानते हैं।,अपने बेजोड़ स्टिक-वर्क और बॉल कंट्रोल की वजह से मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा। वह गेंद और स्टिक के बीच ऐसे तालमेल बैठाते थे कि देखने वालों को भरोसा ही नहीं होता था। यह उनके अभ्‍यास का नतीजा था।,1936 के बर्लिन ओलंपिक में उनके खेल से प्रभावित होकर हिटलर ने उन्हें जर्मन सेना में शामिल होने का ऑफर दिया। हालांकि उन्होंने हिटलर के इस प्रस्‍ताव को ही ठुकरा दिया था। उन्‍होंने अपने देश को चुना था।,

जादुई स्टिक

नीदरलैंड में अधिकारियों को संदेह था कि ध्‍यानचंद हॉकी स्टिक में चुंबक या गोंद लगाकर खेलते हैं। इससे गेंद चिपक जाती है। ऐसे में उनकी हॉकी स्टिक की तोड़कर जांच भी की गई थी।

आत्मकथा

मेजर ध्‍यानचंदकी आत्मकथा का नाम 'गोल' है। यह 1952 में प्रकाशित हुई थी। इसके लेखक मेजर ध्यानचंद ही थे।

डॉन ब्रैडमैन हुए मुरीद

दिग्‍गज क्रिकेटर डॉन ब्रैडमैन ने मेजर ध्यानचंद के खेल को देखकर कहा था कि वे वैसे ही गोल करते हैं, जैसे क्रिकेट में रन बनाए जाते हैं। यह भी पढ़ें- National Sports Day 2024 पर PM Modi ने मेजर ध्यानचंद को किया याद, PR Sreejesh समेत इन दिग्गजों के ट्वीट भी वायरल。

二 | 减持原因为股东自身资金需求。

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Published on:18:01:18


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